विज्युलाइजेशन अर्थात् मनो चित्रण अर्थात् हो सकता है कि
विज्युलाइजेशन शब्द आपको नया लगे किन्तु विज्युलाइजेशन की प्रक्रिया से आप अन्जान
नही है। आप प्रतिदिन Visualization करते हैं। बचपन से करते आये हो, विज्युलाइजेशन
अर्थात् कल्पना, विज्युलाइजेशन अर्थात् मनोचित्रण करना।
किसी भी वस्तु अथवा घटना का मन में चित्र तैयार करना माने विज्युलाइजेशन करना है।
विज्युलाइजेशन को कल्पना करना भी कहा जाता है। अर्थात् विज्युलाइजेशन करना माने
कल्पना करना। विज्युलाइजेशन के रूप में पहचानी जाने वाली कल्पना की यह प्रक्रिया
अधिकांशतः कहा देखने को मिलती है? अधिकतर कैसे लोग
विज्युलाइजेशन करते है?
आओ देखते हैं -
यहाँ सर्वप्रथम उन लोगों की बात करतें है जिन के लिए विज्युलाइजेशन उनके काम का मुख्य आधार है।
(1) शिल्पकार:- कोई शिल्पकार जब उबड़-खाबड़, आड़े-तेड़े आकार वाले पत्थर पर नजर डालता है तो उसके मन में एक मूर्ति आकार लेने लगती है। साथ ही मन में जो मूर्ति बन जाती है और इसके अनुसार शिल्पकार के हाथ काम करते जाते हैं। और अन्त में यही पत्थर एक अद्भुत शिल्प के रूप में सामने आता है। शिल्पकार के मन में इस मूर्ति के हाथ, पैर, सिर सब होते है। शरीर में लालित्य होता है। उसमें लावण्य होता है। चेहरे के ऊपर मुस्कान होती है। आँखों में भाव होते है। शिल्पकार द्वारा अपने मन में मूर्ति रचने की प्रक्रिया ही विज्युलाइजेशन है।
(2) चित्रकार:- विज्युलाइजेशन चित्रकार के लिए अनिवार्य अंग है। कोई भी चित्र जिसे उसकी पेन्सिल बड़े कागज पर उतारती है वह पहले उसके मन में रच जाता है। केनवास पर रंगों से जो अभिव्यक्ति होती है वह पहले चित्रकार के मन में व्यक्त हो जाती है। मन के द्वारा चित्रों को रचने, बनाने की यह प्रक्रिया ही विज्युलाइजेशन है।
(3) कोरियोग्राफर:- स्टेज पर नृत्य प्रस्तुत करने से पहले उसके कोरियोग्राफर के मन में पूरे नृत्य की सारी सिकवेन्स, स्टेप्स तैयार हो जाती है। यह नृत्य उसके मन में पहले भी अनेक बार हो चुका होता है। नृत्य के स्टेप, नृत्य की गति, लय, आदि छोटी से छोटी बातें कोरियोग्राफर के मन में गहराई से उतर चुकी होती है। जो बाद में स्टेज पर प्रदर्शन के रूप में या परफारमेन्स के रूप में सामने आती है।
(4) ग्राफिक डिजाइनर:- आप अखबारों की सुंदर रंगीन पूर्ति (अंक) पढ़ते होंगे। सुंदर रूप से डिजाइन की गई यह पूर्ति या अंक की सामग्री सब से पहले उसके डिजाइनर के मन में आकार ले चुकी होती है। यह पूर्ति लिखने का तरीका, अक्षर, फोटोग्राफी, चित्र आदि किस रंग और किस आकार के होंगे यह सब उसके मन में स्पष्ट होता है। पूर्ति की यह डिजाइन मन में तैयार: माने विज्युलाइजेशन।
(5) फिल्म डायरेक्टर (निर्देशक) :- सिनेमा हाल के बड़े परदे पर हम जिस फिल्म को देख रहे हैं पहले उसके डायरेक्टर ने अपने मानस पटल पर कई बार देख ली हो है। फिल्म की शूटिंग करने के पहले डायरेक्टर अपने मन में फिल्म के प्रत्येक घटना के दृश्य तैयार कर लेता है। फिल्म कलाकार, उनका अभिनय उनके संवाद आदि सब डायरेक्टर के मन में पहले ही आकार ले चुके होते है। मन में यह मनोचित्रण अर्थात् विज्युलाइजेशन। सृजन से पहले की सृजनात्मक कल्पना अर्थात विज्युलाइजेशन। विज्युलाइजेशन केवल कलाकारों का काम है ऐसा नहीं हैं। आप बहूत ही सृजनात्मक ढंग से विज्युलाइजेशन कर सकते हो। किन्तु आप के मन में यह प्रश्न खड़ा नहीं होता की विज्युलाइजेशन किस लिए किया जाए।
जवाब है- नई जिन्दगी का सृजन करने के लिए। हमे जो चाहिए वह सब प्राप्त करने के
लिए।
जिस तरह चित्र, शिल्प, नृत्य, डिजाइन या फिल्म किसी व्यक्ति के विज्युलाइजेशन का परिणाम है ठीक उसी तरह अपनी जिन्दगी भी हमारे द्वारा जाने अनजाने किए गए विज्युलाइजेशन का परिणाम है। क्या आप जानते है कि विज्युलाइजेशन के पीछे कौन सा विज्ञान काम करता है?
“समस्त ब्रह्मांड सृजनात्मक ऊर्जा का धधकता समुद्र है। हम भी इसी का अंश है। इसीलिए
सृजनात्मकता प्रत्येक व्यक्ति में होती है।"



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